संशोधित नियमावली मध्यप्रदेश न्यायिक कर्मचारी संघ samvidhaan


संशोधित नियमावली

1. संघ का नाम: यह संघ 'मध्यप्रदेश न्यायिक कर्मचारी संघ' कहा जावेगा।

2. संघ का पंजीयन कार्यालय: 

    संघ का पंजीयन प्रान्तीय कार्यालय जिला न्यायालय भवन भोपाल तहसील हुजूर जिला भोपाल स्थित रहेगा। इसके उपरांत जिस जिले का प्रान्ताध्यक्ष होगा उस जिले में संघ का प्रान्तीय कार्यालय होगा। स्थान परिवर्तन की सूचना समय-समय पर विधिवत दी जायेंगी।

3. संघ का कार्य क्षेत्र: संघ का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण मध्यप्रदेश होगा।

4. उद्देश्य: 

संघ के उद्देश्य एवं आकांक्षाये निम्नानुसार होंगे:

  1. न्यायिक प्रशासन के आदेशो के प्रति अनुराग एवं आस्था की भावना उत्पन्न करना तथा उसे प्रोत्साहन देना।

  2. पंजीयक एवम् न्यायिक कर्मचारियो तथा उनके परिवार का हित संवर्धन करते हुवे उन्नति के लिए कार्य करना।

  3. न्यायिक कर्मचारियों में प्रान्तत्व की भावना जागृत करना एवम् पारम्परिक सामाजिक कल्याण तथा परस्पर हित संवर्धन के लिये कार्य करना।

  4. न्यायिक सेवा में कार्यरत कर्मचारियो के सेवा नियमों, कर्तव्य एवम् उनके अधिकारों संबंधी सभी प्रकार के विवादो के निराकरण कराने हेतु राज्य शासन एवम् न्याय प्रशासन के समक्ष एक प्रतिनिधि संस्था के रुप मे समस्त कार्य करना।

  5. न्यायिक कर्मचारियों के लिये आवास व्यवस्था कराने हेतु कार्य करना।

  6. वर्तमान में प्रचलित नियम एवम् आदेश (व्यवहार तथा आपराधिक) के सरलीकरण करने तथा अधिक सुविधाजनक बनाने हेतु सक्रिय प्रयास करना।

  7. वरीयता एवम् कार्यक्षेत्र की विशालता के आधार पर आधारित एवम् कार्यरत अन्य संघो अथवा महासंघो से संबंधीकरण करना, इनके कार्यों में सहयोग करना एवम् उनके माध्यम से आवश्यकतानुसार इस संघ की समस्याओं का निराकरण करना।

  8. भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को प्राप्त करना।

  9. संघ की आर्थिक निधि सृदृढ़ करने हेतु यथोचित प्रयास करना।

  10. संघ के हित में अनुदान देना तथा लेना।

  11. अन्य वे सभी कार्य, जो न्यायिक कर्मचारियों के हित में एवम् संघ के उद्देश्यो, उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक हो, करना।

5. परिभाषायें: 

निम्नलिखित कुछ विशेष शब्द उन्ही अर्थो में प्रयुक्त होंगे, जैसे की उन्हे नीचे परिभाषित किया गया है-

(अ) 'अनुच्छेद' का अर्थ होगा इस संविधान का अनुच्छेद।

(ब) 'संघ' से तात्पर्य मध्यप्रदेश न्यायिक कर्मचारी संघ से होगा।

(स) 'संविधान' से तात्पर्य इस संविधान से होगा।

(द) 'कार्यकारिणी समिति' से तात्पर्य ऐसी समिति से होगा जो अनुच्छेद 16 तथा 18 के अधीन गठित की गई हो।

(इ) 'कोष' से तात्पर्य ऐसे कोष से होगा जिसका उल्लेख अनुच्छेद 34 में किया गया है।

(ई) 'सदस्य' से तात्पर्य इस संघ के सदस्य से होगा।

(उ) 'सेवा' से तात्पर्य मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा से होगा।

6. सदस्यता: 1. मध्यप्रदेश की अधीनस्थ जिला स्थापना पर कर्मचारी सेवा में नियोजित होते ही स्वतः संघ की सदस्य बन जायेगा जब तक वह अध्यक्ष / सचिव को लिखित में सूचित न कर देवे।

2. म.प्र. अधीनस्थ जिला न्यायालय स्थापना का प्रत्येक तृतीय श्रेणी कर्मचारी यदि संघ को दान स्वरुप 1000/- रु. प्रांतीय निकाय में जमा करायेगा तो उसे संघ का आजीवन सदस्य बनाया जा सकेगा।

7. साधारण सदस्य एवम् शुल्क: 

1. संघ के प्रत्येक सदस्य तृतीय श्रेणी कर्मचारी को संघ की सदस्यता हेतु निर्धारित प्रपत्र के साथ रुपयें 50/- सदस्यता शुल्क प्रवेश के समय देना होगा तथा प्रति माह 50/- रुपयें अथवा 600/- वार्षिक शुल्क देकर इस संघ का सक्रिय सदस्य कहलायेगा। यह शुल्क प्रत्येक जिला एवं उनकी तहसीलों के कर्मचारीयों को आवश्यक रूप से देना होगा।

2. प्रत्येक सदस्य कर्मचारी को प्रत्येक माह की 10 तारीख तक 50 रु. मासिक शुल्क संघ की जिला शाखा के बैंक खातें में जमा कराना अनिवार्य होगा।

3. प्रत्येक सदस्य मासिक शुल्क 50/- रु. अथवा सीधे जमा करा सकेगा तथा जमा कराने की सूचना जिला शाखा को देगा।

4. अधिकृत सदस्य वही माना जायेगा जिसने विधिवत सदस्यता शुल्क जमा कर सदस्यता ग्रहण की हो तथा मासिक शुल्क भुगतान में त्रुटि न की हों।

5. प्रत्येक जिला शाखा प्रांतीय समिति से संबंद्धीकरण हेतु प्रांतीय निकाय को प्रति वर्ष 1001/- रु. की राशि आवश्यक रुप से भेजेगा, संबंद्धीकरण शुल्क जमा न किये जाने की दशा में प्रांतीय समिति से संबंद्धीकरण समाप्त किया जा सकेगा।

6. प्रत्येक जिला शाखा अपने सदस्यों से प्राप्त होने वाली धनराशि का 50 प्रतिशत भाग प्रांतीय निकाय को आवश्यक रूप से भेजेगा।

7. कोई भी सदस्य न्याय विभाग के किसी संगठन या संघ को छोड़कर अन्य किसी संघ में पदाधिकारी के पद पर रहकर इस संघ की कार्यकारी समिति में नहीं रह सकेगा न ही निर्वाचन में भाग ले सकेगा।

8. किसी भी जिले का कोई भी कर्मचारी प्रांतीय निकाय में 1000 रु. राशि जमा कर आजीवन सदस्य बन सकेगा। प्रांतीय निकाय द्वारा अनिवार्य रुप से आजीवन प्रमाण पत्र जारी किया जावेगा।

8. सम्मानीय सदस्य: संघ की कार्यकारी समिति किसी अन्य व्यक्ति को सम्मानीय सदस्य बना सकती है। वह बैठक में भाग लेकर उचित योगदान दे सकते है तथा उनका सहयोग प्राप्त किया जा सकता है किंतु प्रतिबंध यह है कि इन्हे मत देने का अधिकार नहीं होगा।

9. सदस्यता की समाप्ती: निम्नलिखित स्थितियों में संघ की सदस्यता समाप्त की जावेगी:

(1) संघ से त्यागपत्र देने तथा कार्यकारी समिति द्वारा वह स्वीकार किये जाने पर।

(2) न्यायिक सेवा में कार्यरत कर्मचारी को उसके द्वारा किये जाने वाले किसी सिद्ध अपराध स्वरुप न्यायालय द्वारा दण्डित किया जावेगा एवम् न्यायिक सेवा से निष्कासित (पृथ्क) किये जाने पर।

(3) सदस्य द्वारा मासिक शुल्क के भुगतान में त्रुटि करने अथवा अन्य किसी उपयुक्त कारण से संघ की सदस्यता से त्यागपत्र देने हेतु कहा जाने पर बशर्ते कि ऐसा प्रस्ताव संघ की साधारण सभा द्वारा उपस्थित सदस्यों के 2/3 बहुमत से पारित किया गया हो।

(4) सदस्य की मृत्यु होने अथवा पागल होने पर।

(5) संघ को देय चन्दे की रकम नियमानुसार जमा न करने पर याने लगातार एक वर्ष तक मासिक शुल्क न देने पर।

(6) किसी भी प्रकार से अयोग्य घोषित होने पर।

(7) कोई सदस्य दुर्भावना पूर्वक जानबूझ कर संघ के सिद्धातों अथवा उद्देश्यो के विपरीत कार्य करें जिससे उसकी अनुशासनहिनता या नैतिक पतन सिद्ध हो या उसके कार्यक्लापों से संघ की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचती हो तो 2/3 बहुमत से ऐसे सदस्य को निष्कासित किया जा सकेगा।

10. सदस्यता पंजी: संघ के कार्यालय में सदस्यता पंजी रखी जावेगी जिसमें निम्न विवरण अंकित किये जावेंगे:

(1) सदस्य का नाम, पता, व्यवसाय, पद।

(2) चन्दा या सदस्यता शुल्क का विवरण।

(3) सदस्यता ग्रहण करने की तिथि।

(4) सदस्यता समाप्ती की तिथि।

(5) सदस्यता समाप्ती का करण।

11. साधारण सभा:

(1) जिला शाखा की सधारण सभा उससे संबंद्ध सदस्यों से निर्मित होगी एवम् प्रान्तीय साधारण सभा जिला शाखाओं के प्रतिनिधीयों से निर्मित होगी। साधारण सभा वर्ष में कम से कम एक बार अनिवार्यतः होगी। आवश्यकतानुसार विशेष साधारण सभाओं का आयोजन समय समय पर किया जा सकेगा।

(2) वार्षिक साधारण सभा कार्यसूची सहीत लिखित रुप में सभा की तिथि से 15 दिवस पूर्व अध्यक्ष के आदेशानुसार सचिव द्वारा बुलाई जायेंगी।

(3) साधारण सभा के लिये गण्पूर्ति (कोरम) की संख्या संघ से संबंधीत सदस्यों की संख्या के 3/5 अथवा 20 इनमें से जो भी अधिक हो सक्षम गण पूर्ति मानी जावेंगी।

(4) गणपूर्ति के अभाव में साधारण सभा अध्यक्ष द्वारा निर्धारित समय के लिये स्थगित की जाकर निश्चित समय पश्चात् स्थगित साधारण सभा की कार्यवाही प्रारम्भ की जा सकेगी।

(5) विशेष साधारण सभा कार्यकारी समिति द्वारा अभिप्राय के लिये बुलाई जा सकेगी जो संघ के हित से संबंधित हो अथवा संघ के सदस्यों द्वारा 1/5 किन्तु प्रतिबंध यह है कि यह विशेष साधारण सभा निधारित विषय पर ही विचार करेगी।

(6) संघ की प्रथम साधारण सभा पंजीयन दिनांक से तीन माह के भीतर बुलाई जावेगी। उसमें संघ के पदाधिकारियों का विधिवत निवार्चन किया जावेगा। यदि संबंधित द्वारा साधारण सभा का आयोजित किसी समय नही किया जाता है तो पंजीयक को अधिकार होगा कि संघ की साधारण सभा का भार किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में करावे एवम् पदाधिकारियों का चुनाव विधिवत करावे।

12. साधारण सभा के अधिकार एवम् कर्तव्य: 

(1) वार्षिक प्रतिवेदन तथा वार्षिक लेखा पत्रको पर विचार कर अनुमोदन पारित करना।

(2) वार्षिक आय व्यय लेखा (बजट) आगामी वर्ष के लिये विचारोपरान्त पारित करना तथा लेखा पदाधिकारियों की नियुक्ती करना।

(3) आगामी वर्ष के लिये संघ के पदाधिकारियों का निवार्चन करना।

(4) किसी भी सदस्य / सदस्यों द्वारा अथवा कार्यकारि समिति द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव, विषयों का जो कि साधारण सभा की कार्य सूची में शामिल किये गये है निराकरण करना।

(5) संघ की निधि एवम् सम्मत्ति की उचित व्यवस्था करना।

(6) अन्य विषय सभाध्यक्ष की अनुमति से ग्रहण करना एवम् निर्णय लेना किन्तु प्रतिबंध यह होगा कि प्रस्तावित विषय संविधान के संशोधन संबंधी न हो।

(7) संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव साधारण सभा की प्राप्त सूचना के एक सप्ताह की अवधि में सदस्य द्वारा प्रस्तुत होना आवश्यक है।

13. कार्यकारी समिति सभा: (1) जिला शाखा की कार्यकारि समिति की बैठक प्रत्येक मास में तथा प्रांतीय कार्यकारि समिति की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार अनिवार्य रूप से आयोजित करना होगी। इस सभा में प्रस्तुत होने वाले विचारार्थ प्रस्तावों की सूची तथा बैठक की सूचना बैठक दिनांक से 7 दिवस पूर्व सदस्यों को सचिव द्वारा दी जाना आवश्यक होगी एवम् बैठक का कोरम 1/3 (गणपूर्ति) होगा।

(2) प्रांतीय समिति की आर्थिक स्थिति सृदृढ़ हाने के पूर्व तक प्रातीय कार्यकारी समिति के पदाधिकारियों का बैठक का व्यय संबंधित जिला शाखा जिसका कि वह सदस्य है वे वहन करेगी।

14. विशेष बैठक: साधारण सभा की विशेष बैठक 2/3 सदस्यों द्वारा लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत होने पर निर्धारित विषय पर बुलाई जा सकेगी। विशेष संकल्प पारित हो जाने पर इसकी सूचना 15 दिवस के अन्दर पंजीयक को भेजी जावेगी। पंजीयक को आवश्यक निर्देश एवम् परामर्श देने का अधिकार होगा। संघ का महासम्मेलन प्रत्येक तीन वर्ष में आयोजित होगा। जिसमें नवीन प्रांतीय कार्यसमिति के निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया संपादित की जावेगी।

15. जिला कार्यकारि समिति के कर्तव्य एवम् अधिकार:

(1) कार्यकारि समिति संघ के प्रति उत्तरदायी रहेगी तथा ऐसे उत्तरदायित्व के अधीन संघ के सभी कार्य संचालित करेगी।

(अ) संघ के उद्देश्यो और आकांक्षाओं के अनुरुप कार्य करेगी तथा अनुकुल निर्णय लेगी।

(ब) सभी प्रस्तुत प्रस्तावों का परिक्षण करेगी।

(स) आवश्यकतानुसार संघ के कोष से समय समय पर व्यय करने हेतु समिति अधिकृत होगी।

(द) लेखा पत्रक, आय व्यय पत्रक, बजट आदि तैयार करेगी और साधारण सभा में प्रस्तुत करके अनुमोदन प्राप्त करेगी।

(इ) प्रस्तुत त्याग पत्रों पर विचार कर उपयुक्त निर्णय लेगी।

(ई) संघ की ओर से न्यायिक सेवा अथवा प्रशासकिय अधिकारियों के समक्ष प्रतिवेदन आदि प्रस्तुत करेगी।

(उ) संघ का कार्य संचालित कार्यकारी समिति द्वारा इस संविधान के अधिन बनाये गये नियम, उपनियम अनुसार किया जावेगा।

(य) संघ की संम्पत्ति का संरक्षण एवम् उचित व्यवस्था।

(ऊ) संघ से संबंधित किसी विषय विशेष का परिक्षण करके प्रतिवेदन के लिये उपसमिति नियुक्त कर सकेगी।

(ए) संघ के उद्देश्यों पूर्ति हेतु आवश्यक धन संग्रह करना।

(ऐ) प्रांतीय महा समिति की साधारण सभा में प्रतिनिधी भेजने का निर्णय लेना एवम् विधान में आवश्यक संशोधन प्रस्तावित करना।

(ओ) संघ के उद्देश्यो की पूर्ति हेतु अन्य निर्णय लेना।

16. जिला कार्यकारी समिति का गठन: 

(1) जिला शाखा जिला अध्यक्ष के पद पर निर्वाचन प्रत्येक तीन वर्ष की अवधि के लिए होगा। निर्वाचित अध्यक्ष द्वारा कार्यसमिति के अन्य पदाधिकारिगण का मनोनयन किया जावेगा। जिला कार्यकारी समिति में सामान्यः निम्नलिखित पदाधिकारीगण होगे:

  1. अध्यक्ष-1

  2. उपाध्यक्ष-1, (महिला-01)

  3. सचिव-1

  4. सहसचिव-1

  5. कोषाध्यक्ष-1

  6. संगठन सचिव -02 (महिला-01)

  7. कार्यकारिणी सदस्य -11

    इसके अतिरिक्त जिला अध्यक्ष आवश्यकतानुसार अन्य सदस्यों व तहसील सचिव का मनोनयन कर सकेगा।

    (2) नवनिवार्चित अध्यक्ष द्वारा कार्यकारी समिति के गठन की सूचना प्रांतीय कार्यकारी समिति के प्रांताध्यक्ष एवं प्रांतीय महासचिव को यथासमय लिखित रुप में दी जाना आवश्यक है।

17. प्रांतीय एवं जिला कार्यकारी समिति का कार्यकाल: 

1. प्रांतीय कार्यकारी समिति एवं जिला कार्यकारी समिति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।

2. प्रांतीय कार्यकारी समिति नवीन कार्यसमित का गठन हो जाने की अवधि तक कार्यसमिति कार्यवाहक रुप से कार्य करती रहेगी।

3. जिला कार्य समिति का कार्यकाल पूर्ण हो जाने के उपरांत एक माह की अवधि के अन्दर नवीन निर्वाचन कराना आवश्यक होगा विशेष परिथितियों में प्रांतीय कार्यसमिति से अनुमति प्राप्त कर तीन मह की अवधि बढाई जा सकेगी परन्तु इस अवधि में नवीन निर्वाचन आवश्यक रुप से कराना होगा।

4. जिला कार्यसमिति द्वारा तीन माह की अवधि में निर्वाचन न कराये जाने की दशा में संबंधित जिले की संबंद्धता समाप्त की जाकर प्रांतीय समिति द्वारा निर्वाचन कार्यवाही संपन्न कराई जावेगी।

18. प्रांतीय कार्यकारी समिति का गठन: 

(1) प्रांतीय कार्यकारी समिति क गठन संबंद्ध समस्त जिला शाखा निर्वाचन अध्यक्षगण द्वारा किया जावेगा।

(2) प्रांतीय अध्यक्ष द्वारा कार्यसमिति के अन्य पदाधिकारिगण का मनोनयन किया जायेगा। प्रांतीय कार्यकारी समिति में सामान्यतः निम्नलिखित पदाधिकारीगण होगे:

  1. प्रांताध्यक्ष - 01

  2. संरक्षक - 03

  3. कार्यकारी प्रान्ताध्यक्ष - 02

  4. वरिष्ठ उपप्रान्ताध्यक्ष - 02

  5. उपप्रान्ताध्यक्ष - 10 (01 महिला उपप्रान्ताध्यक्ष)

  6. प्रांतीय महासचिव - 01

  7. संभाग अध्यक्ष - 10

  8. प्रांतीय सहसचिव - 05

  9. प्रांतीय संगठन सचिव - 05

  10. प्रांतीय कोषाध्यक्ष - 01

  11. प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य - 11

    इसके अतिरिक्त आवश्यकता अनुसार अन्य पदाधिकारीगण का मनोनयन प्रान्ताध्यक्ष द्वारा किया जा सकता है।

  12. प्रांतीय कार्यसमिति का तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के पूर्व ही प्रान्ताध्यक्ष द्वारा संघ का महासम्मेलन बुलाया जायेगा और संघ के नवीन प्रान्ताध्यक्ष / कार्यसमिति का चुनाव सर्वसम्मति अथवा गुप्त मतदान के माध्यम से कराना आवश्यक होगा।

  13. प्रांतीय अध्यक्ष द्वारा संभागीय अध्यक्ष का मनोनयन किया जावेगा। संभागीय अध्यक्ष द्वारा अपनी कार्यकारिणी गठित की जावेगी।

  14. किसी जिला शाखा द्वारा कार्यकाल पूर्ण हो जाने के उपरांत विहित अवधि में नवीन निर्वाचन कार्यवाही न किये जाने की दशा में शाखा को भंग कर नवीन निर्वाचन की घोषणा कर सकेगी जो सभी जिला शाखाओं पर बाध्यकारी होगा।

    (3) संभागीय सचिव अपने संभाग में संघ के हित में कार्य करेगें तथा प्रांतीय सभा द्वारा निर्देशित अनुदेशों का जिला शाखाओं द्वारा पालन करावेगें और प्रांतीय कार्यलय को समय समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे।

19. निर्वाचन:

(अ) प्रांतीय समिति:

  1. प्रांतीय समिति के अध्यक्ष का निर्वाचन साधारण सभा में स्थिति अनुसार खुले सर्वसम्मति से अथवा गुप्त मतदान के द्वारा किया जावेगा।

  2. प्रांतीय अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को एवं उसके प्रस्तावक एवं समर्थक को संघ का आजीवन सदस्य होना आवश्यक होगा।

  3. प्रांतीय कार्यकारी समिति निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर सकेगी एवं तत्संबंधी नियम उप नियम निर्धारित करने के लिये प्रांतीय समिति सक्षम होगी तथा उक्त नियमों के अनुसार ही निर्वाचन समिति प्रांतीय समिति के निर्वाचन संपन्न करायेगी।

  4. प्रांतीय अध्यक्ष के निर्वाचन समस्त संबंद्ध जिला शाखा के निर्वाचन अध्यक्षगण मतदान करेंगे।

  5. प्रांतीय कार्यसमिति आवश्यकतानुसार उपसमितियों का गठन कर सकेगी।

(ब) जिला समिति:

  1. जिला कार्यकारी समिति के अध्यक्ष के पद का निर्वाचन साधारण सभा में स्थिति अनुसार खुले अथवा गुप्त मतदान द्वारा किया जावेगा।

  2. जिला शाखा के निर्वाचन के लिए जिला अध्यक्ष पद के उम्मेदवार को एवं उसके प्रस्तावक एवं समर्थक को संघ का आजीवन सदस्य होना आवश्यक होगा।

  3. जिला कार्यकारि समिति निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर सकेगी एवं तत्संबंधी नियम उप नियम निर्धारित कराने के लिए जिला समिति सक्षम होगी।

  4. विवादास्पद परिस्थितियों में जिला स्तरीय समिति के विवादों का निराकरण प्रांतीय समिति करेगी तथा इस संबंध में प्रांतीय समिति का निर्णय अंतिम होगा।

स्पष्टीकरण:

(1) संबंद्ध जिला कार्यकारी समिति प्रांतीय कार्यकारी समिति द्वारा समय समय पर किये जाने वाले निर्देश एवं मार्गदर्शन के अंतर्गत कार्य करने हेतु बाध्य रहेगी एवं प्रांतीय कार्यकारी समिति द्वारा किये गये निर्णय अंतिम माने जावेंगे।

(2) प्रांतीय कार्यकारी समिति को जिला कार्यकारी समिति के प्रत्येक विवाद के निराकरण का पूर्ण अधिकार होगा एवं प्रांतीय कार्यकारी समिति का निर्णय सर्वमान्य होगा।

20. प्रांताध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष के अधिकार: 

प्रांताध्यक्ष, प्रांतीय महा सभा तथा जिला अध्यक्ष जिला शाखा की समस्त बैठको की अध्यक्षता करेंगे तथा समिति के द्वारा साधारण सभा एवं कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित करवायेंगे। प्रांताध्यक्ष व अध्यक्ष का मत विचारार्थ विषयों में निर्णयात्मक होगा।

21. वरिष्ठ उप-प्रांतध्यक्ष / उप-प्रांतध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के अधिकार:

प्रांताध्यक्ष अथवा जिला शाखा की अनुपस्थिति में उपप्रांताध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष साधरण सभा एवं कार्य कारी समिति की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। और प्रांताध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष के अधिकारों का उपयोग करेंगे।

22. प्रांतीय महासचिव एवं जिला सचिव के अधिकार: 

(1) साधारण सभा एवं कार्यकारी समिति की बैठक समय समय पर बुलाना और समस्त आवेदन पत्र तथा सुझाव जो प्राप्त हो प्रस्तुत करना।

(2) संघ की आय व्यय का लेखापत्रक का निरीक्षण करना व अनियमितता पाई जाने पर उसकी सूचना कार्यकारी समिति को देना।

(3) प्रांतीय महासचिव को किसी कार्य के लिए एक समय में 25000/- रु. तथा जिला सचिव को 5000/- रु. तक व्यय करने का अधिकार होगा।

(4) प्रांतीय महासचिव संघ का अधिकृत प्रांतीय प्रवक्ता व जिला सचिव जिले का अधिकृत प्रवक्ता रहेगा।

23. कोषाध्यक्ष के अधिकार: संघ की धनराशि का आय व्यय का पूर्ण हिसाब रखना तथा कार्यकारी समिति द्वारा स्वीकृत पदों पर महासचिव / सचिव की लिखित सूचना इस आशय की प्राप्त होने पर 1000/- रु. तक राशि का व्यय करना संघ का आय व्यय पत्रक लेखापत्रक तैयार करवाना।

24. प्रांतीय महा सभा: (1) प्रांतीय संघ से सम्बद्ध प्रत्येक न्यायिक जिला शाखा के प्रत्येक 50 सदस्यें की संख्या पर 1 के आधार पर अधिक से अधिक 5 अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा महासभ का गठन होगा।

(2) जिला कार्यकारी समितियों द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि प्रांतीय कार्यकारी समिति के सदस्यों का चुनाव करेंगे और निवार्चित सदस्यगण अनुच्छेद 15 के अनुसार कार्यकारी समिति के पदाधिकारीगण का चयन करेंगे।

25. प्रांतीय समिति के अधिकार एवं कर्तव्य: प्रांतीय समिति संघ की सर्वोच्च अधिकार प्राप्त कार्य संचालन समिति होगा।

(2) प्रांतीय समिति जिला कार्यकारी समितियों द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं समस्या पर विचार करेंगी और उपयुक्त निर्णय ले कर कार्यवाही करेगी।

(3) संघ के उद्देश्यों एवं आकांक्षओं के अनुरुप कार्य करना।

(4) संघ के हित में उसके उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समिति द्वारा किया गया निर्णय अंतिम एवं बंधनकारक होगा।

(5) साधारण सभा एवं कार्यकारी समिति की बैठक समय समय पर बुलाना और समस्त आवेदन पत्र तथा सुझाव जो प्राप्त हो प्रस्तुत करना।

(5) जिला समिति के आंतरित विवादों पर विचार करने एवं निर्णय लेना। (नोट: क्रम दस्तावेज़ के अनुसार)

(6) संघ की आर्थिक स्थिति सृदृढ़ करने हेतु सतत प्रयास करना।

(7) म.प्र. शासन एवं न्याय प्रशासन से संबंधित विषयों पर विचार एवं निर्णय।

(8) जिला शाखाओं से संविधान के अधीन धन एकत्रित करना एवं अन्य अनुदान प्राप्त करना।

(9) न्यायालयीन कर्मचारीगण की प्रस्तुत समस्याओं पर विचार करके निर्णय लेना एवं यथोचित कार्यवाही करना।

(10) अन्य सभी कार्य जो संघ तथा कर्मचारीगण के हित में हो।

26. विवाद: संघ के किसी भी प्रकार के विवाद को सुलझाने का प्रांताध्यक्ष को अधिकार होगा। यदि प्रांताध्यक्ष के निर्णय से पक्षों को सन्तोष न हो तो विवाद को निर्णय के लिये रजिस्ट्रार की ओर भेज देंगे। और रजिस्ट्रार का निर्णय अंतिम होगा। रजिस्ट्रार को यह भी अधिकार होगा कि संघ में अनियमितता पाई जाने पर वह कार्यकारी समिति को भंग करके प्रशासक नियुक्त कर देवे। उचित स्थिति निर्माण होने पर प्रशासन साधरण सभा की बैठक आमंत्रित करके उसके पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन कराने के लिये उत्तरदायी होगा। इस व्यवस्था के व्यय का भार संघ पर होगा। यह अवधि दो वर्ष से अधिक नही होगी।

27. पंजीयक द्वारा बैठक बुलाना: संघ के संविधान के अनुसार पदाधिकारियों द्वारा वार्षिक बैठक न बुलाये जाने पर या उक्त प्रकार से आवश्यक होने पर पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए मध्यप्रदेश को या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को संघ की बैठक बुलाने का अधिकार होगा साथ ही वह बैठक में विचारार्थ विषय निश्चित कर सकेगा।

28. पंजीयक को भेजी जाने वाली जानकारी: म.प्र. सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 की धारा 26/27 के अन्र्तगत संघ की वार्षिक आमसभा होने के 30 दिवस के अन्दर निधारित प्रारुप पर कार्यकारी समिति की सूची भेजी जावेगी तथा धारा 28 एवं 36 के अर्न्तगत संघ को परीक्षित लेखा भेजा जावेगा।

29. संशोधन: संघ के हित में पंजीकृत विधान में आवश्यक संशोधन अथवा परिवर्तन प्रस्ताव पारित करने का साधारण सभा को अधिकार होगा और उसकी स्वीकृति पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए की होना आवश्यक होगा। संशोधन साधारण सभा की बैठक में कुल सदस्यों के 2/3 मत से पारित होना अनिवार्य है।

30. व्यवस्था: संघ के संविधान के अधीन निर्मित नियमों / उपनियमों या समस्त नियमों की व्यवस्था संबंधी विषयों पर पंजीयक द्वारा दी गई व्याख्या अंतिम होकर सर्वमान्य होगी।

31. नियम बनाने की शक्ति: इस संविधान के प्रावधानो के अधीन प्रांतीय कार्यकारी समिति संविधान के प्रावधानों को क्रियान्वित करने संघ का कार्य सुचारु रुप से संचालित करने हेतु, नियम, उपनियम बना सकेगी और यदि आवश्यक हुआ तो अन्य जिला कार्यकारी समितियों से परामर्श करके नियमों को मंजूरी दे सकेगी।

32. विघटन: संघ का विघटन प्रांतीय साधारण सभा में सदस्यों के 3/5 मत से किया जा सकेगा। विघटन के पश्चात अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शेष संपत्ति उसके समान उद्देश्य वाले संघ को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दे दी जावेगी।

33. सम्पत्ति: संघ की समस्त चल-अचल संपत्ति उसके नाम से रहेगी तथा समस्त चल अचल संपत्ति रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाए की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय, दान या अन्य प्रकार से हस्तान्तरित नहीं की जावेगी।

34. कोष: (1) संघ का एक कोष होगा, जिसमें सदस्यों को प्राप्त हुआ शुल्क, अन्य स्त्रोतो से प्राप्त आय अथवा प्राप्त अनुदान संघ के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु धनराशि एकत्रित की जा सकेगी।

(2) कोष में एकत्रित होने वाली धनराशि स्थानीय किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा सहकारी साख संस्था में जमा रहेगी तथा कार्यकारी समिति (प्रांतीय अथवा जिला) की सलाह एवं निर्देशन अनुसार सचिव इस कोष से व्यवहार कर सकेगा एवं आय व्यय का विवरण कोषाध्यक्ष को सचिव देगा।



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ